शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

एकाकी होगी अन्तर्यात्रा...

जब, जहाँ से उठूँगा,
वहीं से चल दूँगा...!
जरूरी नहीं होता
चलने के लिए सड़कें नापना;
अन्तःप्रदेश के विभिन्न रास्तों पर भी
दौड़ा जा सकता है--बेधड़क!
मन के चंचल अश्व की भी
की जा सकती है सवारी,
चहुँओर दौड़ाया जा सकता है उसे,
विभिन्न लोकों की
हो सकती है सैर निर्विघ्न;
लेकिन, जरूरी है, बेहद जरूरी है,
अपने अंकुश में रखा जाए मन के घोड़े को
यह तुरंग बहुत वेगवान होता है,
बेलगाम हुआ तो
तुम्हें न जाने कहाँ ले जाए,
किस दलदल में पटक दे
या किस गर्त्त में गिरा दे
अथवा किस नरक में पहुँचा दे, नामुराद!

मानता हूँ,
मेरे-तुम्हारे मन का एका है
गहरा जुड़ाव है,
अटूट संपृक्ति है हमारी;
लेकिन, तुम चाहो भी तो इस यात्रा पर
मेरे साथ नहीं चल सकते प्रिय !
यह अन्तर्यात्रा तो होती है एकाकी--निःसंग
और वह अधिकतर होती तभी है
जब निष्क्रिय होकर शय्याशायी हो जाना पड़े
प्रायः एक पखवारे के लिए..!

हाँ, यह हो सकता है,
तुम अपनी यात्रा पर निकलो
मैं अलग, निःसंग अपनी यात्रा पर,
लेकिन देखना--
अपने विवेक-बल के सबल हाथों में
कसकर थामे रहना लगाम
उस उद्दण्ड
और चंचल मन के अश्व की,
निरंकुश मत होने देना उसे।
जो लोग ऐसा नहीं कर सके हैं
देखो, अपने आसपास
कितने लोग अपना अर्जित यश
धूमिल कर पकेपन में
यातनाएं भोगने और
सिर धुनने को विवश हैं!

अगर तुम ऐसा कर सके,
तब देखोगे--
लंबी दूरियाँ तय करके
हम लौट आये हैं वहीं,
जहाँ से उठकर चल दिये थे--हठात्!

इसी भाव-भूमि पर,
स्वप्न के सत्य से छूटकर
हम फिर मिलेंगे जरूर
एक दिन... प्रिय...!

[--आनन्द. 24-01-2018.]

3 टिप्‍पणियां:

Meena Sharma ने कहा…

सत्य कठोर होता है, कुछ लोग कहते हैं कि सत्य कड़वा होता है,ये भी कहा गया है कि सत्यं-शिवमं-सुंदरम !
अंतिम यात्रा पर अकेले ही जाना होता है, यह अटल और कठोर सत्य है जिसे स्वीकारना दुष्कर कर्म होता है। उनके लिए,जो आत्मा से हमारे साथ और हम उनके साथ जुड़े हों। एक बार इस सत्य को आत्मसात कर लिया तो मनुष्य जल में कमल के फूल की तरह रह सकता है...किंतु ये है बड़ा ही कठिन!!!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (18-02-2017) को "कुन्दन सा है रूप" (चर्चा अंक-2884) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar ने कहा…

बहुत सुंदर