मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

कृत्य का इतिहास...


जो बुद्ध हो गया
जो शुद्ध हो गया,
शांत-वीतराग हो गया--
वह कृत्य से बाहर हो गया,
इतिहास में दर्ज नहीं होगा उसका नाम!

जो बद्ध है,
वह समर में है,
वह करेगा कृत्य
पैदा करेगा हलचल,
जीवन-समुद्र का करेगा महामंथन--
उसे नवनीत मिलेगा या गरल,
प्रश्न यह बिलकुल वृथा है,
आनेवाला समय देगा इसका उत्तर,
यही तो सनातन प्रथा है!

वह संघर्षों के नए द्वार खोलेगा--
धरना देगा, प्रदार्शन करेगा,
तोड़ेगा पुरानी मान्यताएं,
नई राह बनाएगा,
आंदोलित-उद्वेलित करेगा जन-मन को!
छोटी रेखाओं के समानांतर
लम्बी लकीरें खींचेगा,
जन को वजन देगा,
छीनेगा मठाधीशों से धन को,
सबल-समृद्ध करेगा निर्धन को!

प्रश्न सभ्यता-असभ्यता का नहीं,
प्रश्न संयमित-मर्यादित होने का भी नहीं,
प्रश्न है कृत्य का;
वह कृत्य करेगा तभी तो
उसका इतिहास भी होगा...!
क्योंकि--
बुद्ध, शुद्ध, सांत का कोई इतिहास नहीं होता
--यही है सच्चाई!
कृत्य का इतिहास होता है भाई...!!

3 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…


ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन किस रूप मे याद रखा जाएगा जंतर मंतर को मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर !कृत्य ही इतिहास बनता है ,बुद्ध का कृत्य भी एक इतिहास है l
New post जापानी शैली तांका में माँ सरस्वती की स्तुति !
सियासत “आप” की !

आनन्द वर्धन ओझा ने कहा…

सम्मान्य कालीपदजी,
यह कविता एक सहज चिंतन का प्रतिफल है, यह 'भगवान् बुद्ध' से सम्बद्ध नहीं है! हाँ, रचना करते हुए 'आम आदमी' जरूर मेरी चिंता के केंद्र में रहा है! आभार...!
सप्रीत--आ.