रविवार, 28 फ़रवरी 2010

कोई रंग ऐसा...

[होली बोली दबी जुबां से...]


टेसू और पलाश में वो टहक न रही,
रंगे-अबीर में वो मोहिनी महक न रही !
जिस रंग से रौशन था मन का आईना,
उस नूर में वो पहले-सी चमक न रही !!

होली है तो झूमेंगे, नाचेंगे, गायेंगे,
जाकर बाज़ार से रंगो-गुलाल लायेंगे !
रँग दोगे मुझको तुम, तुमको रंगेंगे हम,
रंगों में भी बे-रंग हम नज़र आयेंगे !!

बचा सको तो बचा लो दामन यारों,
निगाहें पाक रखो, रंग लो ये तन यारों !
जिस्म बेदार न हो, फिक्र को सुकून मिले,
कोई रंग ऐसा मेरी रूह पे डालो यारों !!

{मैं कहता हूँ गला खोलकर -- "होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं !"}

12 टिप्‍पणियां:

ज्योति सिंह ने कहा…

बचा सको तो बचा लो दामन यारों,
निगाहें पाक रखो, रंग लो ये तन यारों !
जिस्म बेदार न हो, फिक्र को सुकून मिले,
कोई रंग ऐसा मेरी रूह पे डालो यारों !!
laazwaab ,ye rang to bha gaya ,
aanand ji namaskaar
aapko holi ke pavan parv par dhero badhaiyaa

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

"जिस्म बेदार न हो, फिक्र को सुकून मिले,
कोई रंग ऐसा मेरी रूह पे डालो यारों !!"
अद्भुत रंग ! राम करें यही रंग सब पर चढ़ जाय !

"आपको भी होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं !"

बेचैन आत्मा ने कहा…

निगाहें पाक रखो, रंग लो ये तन यारों !
जिस्म बेदार न हो, फिक्र को सुकून मिले,
कोई रंग ऐसा मेरी रूह पे डालो यारों !!
....बहुत सुंदर पक्तियां हैं.
लेकिन मीरा इन सब चक्करों में नहीं पडतीं..सीधे कहती हैं...मोहे श्याम रंग रंग दे...

Suman ने कहा…

आपको तथा आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ.nice

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया!

ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.


आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

वन्दना ने कहा…

waah ..........bahut sundar jazbaat.

happy holi.

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

आनंद भैया ,
बचा सको तो बचा लो दामन यारों,
निगाहें पाक रखो, रंग लो ये तन यारों !
जिस्म बेदार न हो, फिक्र को सुकून मिले,
कोई रंग ऐसा मेरी रूह पे डालो यारों !!

बहुत सुंदर सच रूह को सुकून दे गई ये पंक्तियां
होली की शुभ कामनाएं स्वीकार करें

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

रँग दोगे मुझको तुम, तुमको रंगेंगे हम,
रंगों में भी बे-रंग हम नज़र आयेंगे !!
बहुत सुन्दर...लगभग चमत्कृत करती है ये रचना. होली की असीम अनन्त शुभकामनायें, आशीर्वाद की इच्छा सहित-

अपूर्व ने कहा…

आदरणीय ओझा जी..उम्मीद है कि आपकी ’बेरंग’ नजर आने की अपेक्षा के विपरीत होली के शरीर रंगों ने आपके दिल-ओ-दिमाग को तर-बतर करने मे कोई कसर नही छोड़ी होगी...
रूह को रंग डालने के इसी ख्वाहिश को कोरस देते हुए आपकी रंगों के पर्व पर ढ़ेर सारी मीठी शुभकामनाएं...

Kishore Choudhary ने कहा…

जिस्म बेदार न हो, फिक्र को सुकून मिले...
जाने कैसा खयाल है कि दिल तक उतरता जाता है.

शरद कोकास ने कहा…

समय बदल गया है भाई।

आनन्द वर्धन ओझा ने कहा…

आप सबों के स्नेह और संवाद से कुछ रंगीले छींटे तो रूह पर पड़ ही गए आखिरश ! बहुत आभारी हूँ !
सप्रीत--आ.